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लोन रीपेमेंट बनाम इन्वेस्टमेंट: इनमें से कौन-सा रास्ता चुनना चाहिए?

आदिल शेट्टी
Image sorce: snowing/Freepik

प्रश्न: लोन रीपेमेंट बनाम इन्वेस्टमेंट: इनमें से कौन-सा रास्ता चुनना चाहिए?

उत्तर: पहले लोन चुकाने या उस पैसे को निवेश करने का फैसला आपके लोन के इंटरेस्ट रेट पर या आपके निवेश के मामले में आपके प्रत्याशित रिटर्न पर निर्भर करता है। इसलिए, आपके सामने निम्नलिखित ऑप्शन हैं:

  • यदि लोन का इंटरेस्ट, निवेश के प्रत्याशित रिटर्न से अधिक है तो आप सबसे पहले अपना लोन चुकाने पर विचार कर सकते हैं।
  • यदि लोन का इंटरेस्ट, निवेश के प्रत्याशित रिटर्न से कम है तो आप एक शानदार रिटर्न पाने के लिए निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।

इस तरह का फैसला लेते समय आपको टैक्स देनदारी के प्रभाव पर भी विचार करना चाहिए। मान लीजिए, आपके हाथ में कुछ एक्स्ट्रा अमाउंट है और आपको होम लोन के रीपेमेंट और एक म्यूच्यूअल फंड इक्विटी स्कीम में निवेश इन दोनों में से किसी एक को चुनने का फैसला करना है। यदि आपने लोन के प्रिंसिपल अमाउंट के पेमेंट के लिए 80(C) का भरपूर लाभ नहीं उठाया है तो एक्स्ट्रा अमाउंट का रीपेमेंट करके आप उस हद तक टैक्स बेनिफिट को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, जल्दी से लोन का रीपेमेंट करके बचाए गए इंटरेस्ट के साथ टैक्स के बाद मिलने वाले ROI की तुलना करके पता लगाएं कि इनमें से कौन अधिक फायदेमंद है। इसके अलावा, जल्दी से लोन का रीपेमेंट करने से पहले लोन के प्रकार की जांच करें क्योंकि यह कुछ मामलों (जैसे एक पर्सनल लोन) में एक प्रीपेमेंट पेनाल्टी के अधीन भी हो सकता है।

एक्स्ट्रा अमाउंट को निवेश करने से पहले एक निवेश से संबंधित जोखिम की भी जांच कर लें। यदि जोखिम बहुत अधिक है तो पहले लोन अमाउंट का रीपेमेंट करना बेहतर है। जल्दी से लोन रीपेमेंट करने से पहले, आपको अपने क्रेडिट स्कोर पर इसके प्रभाव की भी जांच कर लेनी चाहिए।

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